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Happy deepavali 2019 - दीपावली मानाने के 9 कारण, दीपावली क्यों मनाई जाती है, दीपावली क्यों मनाई जाती है कारण

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दीपावली यानी उजालों का त्यौहार deepawali means festival of light जिसे दिवाली  बग्वाल  भी कहा जाता है प्रत्येक वर्ष बड़े धूमधाम से मनाया जाने वाला प्राचीन हिंदू त्यौहार है, विश्व के कुछ अन्य भागों में भी दीपावली को उतने ही धूमधाम से मनाया जाता है जितना कि हिंदुस्तान में यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत या अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है।
   हिंदुस्तान में दीपावली deepawali सिर्फ हिंदुओं के द्वारा ही धूमधाम से नहीं मनाई जाती अपितु सिख, जैन आदि समुदायों में भी दीपावली deepavali का उतना ही महत्वपूर्ण स्थान है जितना कि हिंदुओं के धर्म में है ।

  भारतवर्ष विविधताओं का देश है यहां अनेक धर्म के लोग अनुयाई रहते हैं एवं अनेक पर्व त्योहार यहां मनाए जाते हैं भारत में मनाए जाने वाले त्योहारों में दीपावली का धार्मिक महत्व और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है।

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क्यों मनाई जाती है दीपावली:-  

भारत में दीपावली अलग-अलग धर्मों एवं पन्थों के लोगों हिंदुओ, सिखों, जैनों द्वारा मनाई जाती है प्रत्येक धर्म में दीपावली deepavali का अपना-अपना महत्वपूर्ण स्थान  है वह इसका मनाने का भी अपना-अपना तर्क है-

 हिंदुओं में दीपावली

1. अधर्म पर धर्म की जय 

भारत में प्रत्येक वर्ष दीपावली deepawali को हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह में मनाया जाता है हिंदू धर्म के अनुसार अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र 14 वर्ष का वनवास पूर्ण करके जब अयोध्या लौटे थे तो अयोध्या वासियों ने प्रभु श्री राम, उनके भाई लक्ष्मण तथा माता सीता का ढोल नागणों तथा दीप जलाकर स्वागत किया था।
  श्रीराम इस समय असुर राज लोकापति रावण का वध करके लौटे थे इसलिए तब से आज तक दीपावली deepavali को बुराई पर अच्छाई की जीत व अंधकार पर प्रकाश की जीत के रूप में मनाया जाता है इस पर्व में लोगों के मन में यह विश्वास बढ़ता है कि बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होती है अर्थात "सत्यमेव जयते" सत्य की जीत होती है।


2. जब भगवान श्री हरि विष्णु ने तीन पग में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को माप लिया:-

भगवान वामन अर्थात श्री विष्णु के अवतार ने राजा बलि से दान में तीन कदम भूमि मांग ली जब राजा बलि अपने गुरु के माध्य्म से 100वाँ यज्ञ पूरा करके तीनों लोक अर्जित करना चाहते थे और उसी समय भगवान वामन ने अपने विराट रूप लेकर तीनों लोक ले लिए। इसके बाद सुतल का राज्य बलि को प्रदान किया। सुतल का राज्य जब बलि को मिला तब वहां उत्सव मनाया गया, तबसे दीपावली की शुरुआत हुई।

3. समुद्र मंथन से माँ लक्ष्मी जी का अवतार:-

समुद्र मंथन के समय क्षीरसागर से महालक्ष्मीजी उत्पन्न हुई। उस समय भगवान नारायण और लक्ष्मीजी का विवाह प्रसंग हुआ, तबसे दीपावली मनाई जा रही है। कहा जाता है कि इस दिन माँ लक्ष्मी भूलोक पर आती है और धन की बरसात करती है, इसलिए लोग माता के स्वागत के लिए घरों में सफाई करके दीप जलाकर लक्ष्मीजी का स्वागत करते हैं।



4. जब भगवान विष्णु ने लिया नरसिंह अवतार:-

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था। इस आततायी राक्षश के मरने की खुशी में  इसी दिन से दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है।

5. नरकासुर का अंत:-

 द्वापरयुग में राक्षस नरकासुर ने 16 हजार औरतों का अपहरण कर उन्हें बंदी बना लिया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया और उन महिलाओं को मुक्त किया। कृष्ण भक्तिधारा के लोग इसी दिन को दीपावली के रूप में मनाते हैं।

6. आग की खोज 

 एक अन्य मान्यता है कि आदिमानव ने जब अंधेरे पर प्रकाश से विजय पाई, तबसे यह उत्सव मनाया जा रहा है। इसी दौरान आग जलाने और उनके साधनों की खोज हुई। उस खोज की याद में वर्ष में एक दिन दीपोत्सव मनाया जाता है।


7. जब शक्ति ने धारण किया महाकाली का विकराल रूप :-

राक्षसों का वध करने के बाद भी जब महाकाली का क्रोध कम नहीं हुआ तब भगवान शिव स्वयं बाल रूप में उनके चरणों में लेट गए। भगवान शिव के बाल रूप शरीर के स्पर्श मात्र से ही देवी महाकाली का ह्रदय परिवर्तित होकर क्रोध समाप्त हो गया। इसी की याद में उनके शांत रूप लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत हुई। इसी रात इनके रौद्ररूप काली की पूजा का भी विधान है।



8. जैन धर्म मे दीपावली:-

 जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी हुए महावीर स्वामी mahaveer swami ने दुनिया को सत्य अहिंसा का पाठ पढ़ाया भगवान महावीर ने ईसा पूर्व 527, 72 वर्ष की आयु में बिहार की पावापुरी (राजगीर) में कार्तिक कृष्ण अमावस्या को निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया।
 जैन धर्म में दीपावली महावीर स्वामी के निर्वाण (मोक्ष) दिवस के रूप में मनाई जाती।

9. सिख धर्म मे दीपावली:-

 सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद साहिब guru hargovind sahib को बादशाह जहांगीर ने ग्वालियर के किले में कैद किया जहां पहले ही 52 हिंदू राजाओं को कैद में रखा गया था जब गुरु हरगोविंद जेल में आए तो राजाओं ने उनका सम्मान किया जिसे देखकर मुगल बादशाह जहांगीर चकित रह गए उन्होंने गुरु हरगोविंद सिंह की रिहा करने का फैसला सुनाया तो हरगोविंद ने 52 राजाओं की रिहाई की बात की अंत में मुगल जहांगीर ने कार्तिक की अमावस्या यानी दीपावली को गुरु हरगोविंद व 52 हिंदू राजाओं को रिहा किया।
 सिख इस दिन को बंदी छोड़ दिवस chod divash के रूप में मनाते हैं।

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